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दिल्ली सरकार ने 15 सदस्यीय पूसा बायो डीकंपोजर इंपैक्ट असेसमेंट कमेटी का निर्माण किया

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गोपाल राय (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

दिल्ली सरकार ने पराली पर बाॅयो डीकंपोजर केमिकल छिड़काव के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए 15 सदस्यीय पूसा बाॅयो डीकंपोजर इंपैक्ट कमेटी गठित की है. पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि कमेटी में 5 विधायकों को भी शामिल किया गया है, जो अधिकारियों और पूसा के वैज्ञानिकों साथ प्रभावों का आंकलन करेंगे और दिल्ली सरकार दीपावली बाद आंकलन रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे. श्री राय ने केंद्र सरकार के गठित नए आयोग से अपेक्षा की है कि आयोग सभी राज्यों में टीम बना कर राज्य सरकार की तरफ से बाॅयो डीकंपोजर केमिकल का छिड़काव कराना सुनिश्चित करेगा.

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उन्होंने बताया कि ग्रीन दिल्ली एप पर अब तक आईं करीब 2300 शिकायतें में से 1346 निस्तारित हो चुकी हैं, सबसे अधिक शिकायतें नार्थ एमसीडी के क्षेत्र से आई हैं. दिल्ली सरकार की 14 स्क्वाॅयड टीमें सोमवार से ग्रीन एप पर आई शिकायतों के निस्तारण की हकीकत जानने के लिए जमीन पर उतरेंगी. पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है. दिल्ली पुलिस, संभागीय आयुक्त और पर्यावरण विभाग इस पर एसओपी बनाने के लिए सोमवार को बैठक करेंगे.

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि दिल्ली के अंदर बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार की तरफ से पिछले एक महीने से ‘युद्ध, प्रदूषण के विरुद्ध’ अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत दिल्ली में प्रदूषण पैदा करने वाले सभी स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार अलग-अलग मोर्चों पर काम कर रही है. दिल्ली के अंदर पराली बहुत कम जलती है, लेकिन इस बार लॉकडाउन और कोरोना की वजह से मजदूरों के घर जाने से मशीन से फसल की काफी कटाई की गई. राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र (पूसा) के साथ मिलकर दिल्ली सरकार ने पराली को जलाने की बजाय गलाने के लिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में बायो डीकंपोजर का निःशुल्क छिड़काव किया है.

दिल्ली के लगभग 2000 एकड़ क्षेत्र में गैर बासमती धान की उपज होती है, उसमें से अब तक 1800 एकड़ खेतों में बाॅयो डीकंपोजर का छिड़काव हो चुका है. नजफगढ़ क्षेत्र में कुछ जगहों पर पानी लगने से धान की कटाई देर से हुई है. अगले 3 से 4 दिनों में हम 2000 एकड़ जमीन पर छिड़काव के लक्ष्य को पूरा कर लेंगे. बाॅयो डीकंपोजर को लेकर लोगों के मन में दो-तीन प्रश्न थे. पहला जो सबसे बड़ा प्रश्न था कि इसमें समय कितना लगेगा और क्या बाॅयो डीकंपोजर का प्रयोग करने के बाद अगली फसल की बुवाई समय से हो सकती है. हम लोगों ने इसकी शुरुआत 13 नवंबर को हिरनकी गांव से की थी. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसका अवलोकन किया. वहां पर लगभग 90 से 95 फीसदी पराली गल कर खाद में तब्दील हो चुकी है. 

गोपाल राय बताया कि दिल्ली के सभी हिस्सों में हमने बाॅयो डीकंपोजर का छिड़काव किया है और पूरी दिल्ली के अंदर इसका क्या असर रहा है, इसका आंकलन करने के लिए दिल्ली सरकार, पूसा बाॅयो डीकंपोजर इंपैक्ट असेसमेंट कमेटी का गठन कर रही है. इस कमेटी में 15 सदस्य होंगे. दिल्ली के उत्तर, पश्चिम और दक्षिण क्षेत्र, जहां पर धान की खेती होती है और केमिकल का छिड़काव हुआ है, वहां पर कमेटी के सदस्य जाकर जमीनी हकीकत की जांच करेंगे कि, बायो डी-कंपोजर के छिड़काव का क्या असर हुआ है? 15 सदस्यीय कमेटी में पांच विधायक सदस्य होंगे.

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी नया आयोग बनाया है. मैं उन सभी सदस्यों को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने एमएम कुट्टी की अध्यक्षता में जिम्मेदारी संभाली है. दिल्ली में भी प्रदूषण पैदा होता है, लेकिन आज जो संकट गहराया है. उस संकट में 44 फीसदी प्रदूषण पराली के कारण होता है. आज पराली का यदि प्रदूषण में योगदान नहीं होता, तब भी दिल्ली के अंदर प्रदूषण होता, लेकिन यह जो गंभीर हालात पैदा हुए हैं, शायद इसका सामना दिल्ली को नहीं करना पड़ता. सरकार ने यह निर्णय लिया है कि कमेटी की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के सामने भी रखेंगे. यह उम्मीद भी करते हैं कि नया आयोग दिल्ली के अंदर सबसे कम पैसे में जो सामाधान तैयार हुआ है, उसके बारे में भी विचार करेगा. जिससे पराली को जलाने की जगह गलाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से पराली जलाने पर किसानों पर एफआईआर दर्ज करने की खबरें आ रही हैं. कई लोगों को जेल में बंद कर दिया गया है. यह पराली का समाधान नहीं है.



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